Tuesday, 4 September 2012

कभी तो रोता है ....


7 comments:

  1. आदमजात कभी तो रोता है....सही लिखा है आपने बिलकुल....इंसान कितना भी मजबूत हो खुदगर्ज हो..पर कभी न कभी हर इंसान कि जिंदगी में एक ऐसा दौर जरूर आता है...जब वो अपने आप को कमजोर हारा हुआ, और बिखरा महसूस करता है ....और उसे भी एक कंधे कि यानी साहारे कि जरुरत होती है....ऐसा लगा पढ़ कर के बहुत दिल से और महसूस करके लिखा है आपने इस कविता को....बहुत बढ़िया .....धन्यवाद इतनी सुन्दर रचना के लिए भाई .......

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  2. अच्छा है, अनुराग जी, कभी ना कभी तो हर कोई रोता, सच्ची बात, अच्छे तरीके से कही गयी. Good work!

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  3. wonderful script bro, 've been goin through diz over and over (not 'coz i don't understand hindi much...lol) but its really worth reading.. Nice work..!!


    ZINDAGI- ♥ Rockz ♥

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  4. Bahot hi sundar shabdo ka chayan... bade bhai, sach h kabhi na kabhi esa jarur hota hai har koi rota h fir chahe wajah koi b ho... superb.

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  5. बहुत बहुत आभार !!! प्रिती, नीरज जी, शशी, दिव्या .. बहुत बहुत आभार ..!!! thank you so much !!!!!

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  6. bahut hi shaandaar likha hai anurag bhai... waah kya baat hai......

    ---sudeep

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  7. सुंदर रचना--- रोता है तभी तो आदमजात जीता है भाई...!!

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